अपना खुद का घर होना हर भारतीय का सपना होता है। लेकिन जब हम इस सपने को सच करने निकलते हैं, तो सबसे पहला सवाल जो दिमाग में आता है वो है "अंडर-कंस्ट्रक्शन (Under-construction) प्रॉपर्टी लें या रेडी-टू-मूव (Ready-to-move)?" पिछले कुछ सालों में भारतीय रियल एस्टेट मार्केट का नक्शा बदला है। RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) के आने से पारदर्शिता बढ़ी है, लेकिन फिर भी दोनों विकल्पों के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं। 2026 के इस दौर में, जहाँ होम लोन रेट्स और प्रॉपर्टी की कीमतें तेजी से बदल रही हैं, एक सही फैसला आपके लाखों रुपये बचा सकता है।
इस ब्लॉग में हम गहराई से समझेंगे कि आपकी लाइफस्टाइल, बजट और ज़रूरत के हिसाब से कौन सा विकल्प बेहतर है।
अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी क्या है?
अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी वह होती है जिसकी बिल्डिंग का काम अभी चल रहा है। यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती स्टेज (Excavation) पर हो सकता है या फिर फिनिशिंग फेज में। इसमें आपको घर का कब्ज़ा (Possession) बिल्डर द्वारा तय की गई एक भविष्य की तारीख पर मिलता है।
रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी क्या है?
रेडी-टू-मूव-इन (RTM) प्रॉपर्टी वह होती है जो पूरी तरह बनकर तैयार है और जिसे ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) मिल चुका है। आप पैसे दें, रजिस्ट्री करवाएं और तुरंत रहने चले जाएं।
1. कीमत का अंतर (Price Comparison)
घर खरीदते वक्त बजट सबसे बड़ा फैक्टर होता है।
अंडर-कंस्ट्रक्शन: ये प्रॉपर्टीज अक्सर 10% से 25% तक सस्ती होती हैं। अगर आप प्रोजेक्ट के लॉन्च (Launch) के समय खरीदते हैं, तो आपको बहुत अच्छे डिस्काउंट और डील्स मिल सकते हैं।
रेडी-टू-मूव: चूँकि घर तैयार है और इसमें कोई रिस्क नहीं है, इसलिए बिल्डर या सेलर इसके लिए 'प्रीमियम' चार्ज करता है। आपको मार्केट प्राइस पर या उससे थोड़ा ज्यादा ही भुगतान करना पड़ सकता है।
एक्सपर्ट टिप: अगर आपका बजट कम है और आप 2-3 साल इंतजार कर सकते हैं, तो अंडर-कंस्ट्रक्शन आपके लिए पैसा बचाने का एक बेहतरीन जरिया है।
2. GST और टैक्स का गणित (Tax Implications)
टैक्स की बचत भी एक तरह की कमाई ही है। दोनों प्रॉपर्टीज पर टैक्स के नियम अलग हैं:
तुलनात्मक तालिका: टैक्स और अन्य खर्च
| कारक (Factor) | अंडर-कंस्ट्रक्शन | रेडी-टू-मूव (With OC) |
|---|---|---|
| GST दर | 5% (स्टैंडर्ड) / 1% (अफोर्डेबल) | 0% (कोई GST नहीं) |
| Stamp Duty | देनी होगी | देनी होगी |
| Home Loan Tax Benefit | पजेशन के बाद ही शुरू होता है | तुरंत शुरू हो जाता है |
ध्यान दें: अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी पर आपको GST देना पड़ता है। वहीं, रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टीज (OC प्राप्त) को GST से बाहर रखा गया है, जिससे खरीदार को सीधा आर्थिक लाभ होता है।
3. पजेशन का रिस्क और RERA की भूमिका
पहले के समय में निर्माणाधीन घर लेना एक बड़ा खतरा माना जाता था क्योंकि प्रोजेक्ट्स सालों-साल लटके रहते थे। लेकिन अब RERA 2.0 (2026) के सख्त नियमों ने इसे काफी सुरक्षित बना दिया है।
देरी का डर: अंडर-कंस्ट्रक्शन में देरी होने का डर अभी भी थोड़ा रहता है, लेकिन RERA की वजह से अगर बिल्डर देरी करता है, तो उसे आपको हर महीने का ब्याज (Interest) देना पड़ेगा।
मानसिक शांति: रेडी-टू-मूव में "जो आप देख रहे हैं, वही आपको मिल रहा है" वाला हिसाब है। आपको बिल्डर के झूठे वादों का डर नहीं रहता।
4. निवेश पर रिटर्न (ROI)
अगर आप एक निवेशक (Investor) हैं, तो आपका नजरिया अलग होगा:
कैपिटल एप्रिसिएशन (Value Growth): अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी में वैल्यू बढ़ने की गुंजाइश ज्यादा होती है। जैसे-जैसे बिल्डिंग का काम बढ़ता है, उसकी कीमत बढ़ती जाती है। पजेशन तक आपकी प्रॉपर्टी की वैल्यू 20-40% तक बढ़ सकती है।
रेंटल इनकम (Rental Income): अगर आपको तुरंत किराया चाहिए, तो रेडी-टू-मूव बेहतर है। आप आज घर खरीदें और अगले महीने से किराया आना शुरू हो जाएगा।
5. निर्माण की गुणवत्ता (Construction Quality)
रेडी-टू-मूव: आप खुद जाकर चेक कर सकते हैं कि दीवारों में सीलन तो नहीं है, फिटिंग्स कैसी हैं, और बालकनी से व्यू कैसा दिखता है।
अंडर-कंस्ट्रक्शन: आप सिर्फ 'सैंपल फ्लैट' देख सकते हैं। असली घर की क्वालिटी का अंदाज़ा सिर्फ बिल्डर के पुराने प्रोजेक्ट्स को देखकर लगाया जा सकता है। हालाँकि, आप कंस्ट्रक्शन के दौरान बीच-बीच में साइट विजिट कर सकते हैं।
6. भुगतान में लचीलापन (Payment Flexibility)
CLP (Construction Linked Plan): अंडर-कंस्ट्रक्शन में आपको सारे पैसे एक साथ नहीं देने होते। जैसे-जैसे मंजिलें बनती हैं, वैसे-वैसे पेमेंट करनी होती है। इससे आपकी जेब पर अचानक बोझ नहीं पड़ता।
Ready-to-Move: यहाँ आपको पूरा पैसा (डाउनपेमेंट + बैंक लोन) तुरंत देना होता है। इसके अलावा, आपको तुरंत EMI और शायद पुराने घर का किराया, दोनों एक साथ मैनेज करने पड़ सकते हैं।
7. होम लोन और Pre-EMI का बोझ
जब आप निर्माणाधीन घर के लिए लोन लेते हैं, तो पजेशन तक आपको सिर्फ 'Pre-EMI' (सिर्फ ब्याज) देना होता है। लेकिन ध्यान रखें, प्री-ईएमआई में आपका मूलधन (Principal) कम नहीं होता।
रेडी-टू-मूव में आपकी पूरी EMI शुरू हो जाती है, जिससे आपका लोन जल्दी खत्म होना शुरू होता है और आपको इनकम टैक्स की धारा 80C और 24(b) के तहत तुरंत छूट मिलने लगती है।
मुख्य अंतर: एक नज़र में (Summary Table)
| विशेषता | अंडर-कंस्ट्रक्शन | रेडी-टू-मूव |
|---|---|---|
| पजेशन (कब्ज़ा) | 2 से 5 साल का इंतज़ार | तुरंत (Immediate) |
| कीमत | कम और किफायती | अधिक (प्रीमियम) |
| GST | लागू होता है (1% - 5%) | शून्य (Nil) |
| जोखिम | प्रोजेक्ट देरी का डर | कोई जोखिम नहीं |
| कस्टमाइजेशन | थोड़े बदलाव संभव हैं | जैसा है, वैसा ही लेना होगा |
| सुविधाएं | लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और डिज़ाइन | पुराने डिज़ाइन हो सकते हैं |
निष्कर्ष: आपको क्या चुनना चाहिए?
आप अंडर-कंस्ट्रक्शन चुनें अगर:
आपका बजट थोड़ा कम है और आप किश्तों में भुगतान चाहते हैं।
आप अगले कुछ सालों तक इंतजार कर सकते हैं।
आप भविष्य में प्रॉपर्टी की कीमतों में भारी उछाल का फायदा उठाना चाहते हैं।
आप चाहते हैं कि आपकी बिल्डिंग बिल्कुल नई और आधुनिक सुविधाओं वाली हो।
आप रेडी-टू-मूव चुनें अगर:
आपको तुरंत रहने के लिए घर चाहिए या आप किराए से परेशान हैं।
आप किसी भी तरह का 'Delay Risk' नहीं लेना चाहते।
आप GST बचाना चाहते हैं और तुरंत टैक्स छूट का लाभ लेना चाहते हैं।
आप घर की बनावट और क्वालिटी को अपनी आँखों से परखना चाहते हैं।
रियल एस्टेट में निवेश करना एक बड़ा फैसला है। 2026 के मार्केट ट्रेंड्स बताते हैं कि चाहे आप जो भी विकल्प चुनें, बिल्डर का RERA नंबर और उसका ट्रैक रिकॉर्ड चेक करना सबसे अनिवार्य है।
