इंडिया बजट 2026: किफायती आवास (Affordable Housing) के बजट में बढ़ोतरी, लेकिन क्या रियल एस्टेट सेक्टर की उम्मीदें पूरी हुईं?

02 Feb 2026 Real Estate News

भारत के विकास की कहानी में रियल एस्टेट सेक्टर एक रीढ़ की हड्डी की तरह है। 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री ने मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लिए 'किफायती आवास' (Affordable Housing) को लेकर कई बड़ी घोषणाएं कीं। बजट 2026 में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत आवंटन में वृद्धि तो की गई है, लेकिन इंडस्ट्री के दिग्गजों और विशेषज्ञों का मानना है कि सेक्टर की कुछ बुनियादी मांगों को इस बार भी अनसुना कर दिया गया है।

इस ब्लॉग में हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि बजट 2026 ने भारतीय रियल एस्टेट, खासकर होम-बायर्स और निवेशकों के लिए क्या नए अवसर पैदा किए हैं और कहाँ चुनौतियाँ बरकरार हैं।

बजट 2026: किफायती आवास के लिए नई दिशा

सरकार ने "Housing for All" के अपने संकल्प को दोहराते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के शहरी और ग्रामीण दोनों घटकों के लिए बजट में लगभग 15% की बढ़ोतरी की है। 2026-27 के लिए आवंटित यह राशि विशेष रूप से उन लोगों के लिए है जो पहली बार घर खरीद रहे हैं या जो झुग्गी-झोपड़ियों से निकलकर पक्के मकान में जाना चाहते हैं।

PMAY 2.0 का विस्तार और लक्ष्य

बजट में PMAY के दूसरे चरण (2.0) पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य अगले दो वर्षों में 1 करोड़ अतिरिक्त घर बनाने का है। इसका सीधा असर स्टील, सीमेंट और कंस्ट्रक्शन लेबर मार्केट पर पड़ेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

बजट की मुख्य विशेषताएं: एक नजर में

नीचे दी गई तालिका बजट 2026 के प्रमुख रियल एस्टेट आवंटनों और उनके पिछले वर्ष से तुलना को दर्शाती है:

मद (Category)आवंटन (2025-26)आवंटन (2026-27)प्रभाव (Impact)
PMAY (शहरी)₹30,000 करोड़₹34,500 करोड़सकारात्मक
PMAY (ग्रामीण)₹54,000 करोड़₹62,000 करोड़सकारात्मक
शहरी बुनियादी ढांचा₹18,000 करोड़₹21,000 करोड़मध्यम

रियल एस्टेट इंडस्ट्री की क्या थी उम्मीदें?

हर साल की तरह, इस बार भी रियल एस्टेट डेवलपर्स और संस्थाओं (जैसे CREDAI और NAREDCO) ने सरकार के सामने मांगों की एक लंबी सूची रखी थी। इंडस्ट्री का मानना है कि केवल सरकारी सब्सिडी बढ़ाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि कुछ नीतिगत बदलावों की भी सख्त जरूरत है।

1. 'इंडस्ट्री स्टेटस' की मांग (Industry Status)

रियल एस्टेट सेक्टर लंबे समय से 'पूर्ण उद्योग का दर्जा' (Industry Status) मांग रहा है। यदि ऐसा होता, तो डेवलपर्स को बैंकों से कम ब्याज दरों पर कर्ज मिल पाता, जिससे प्रोजेक्ट की लागत कम होती और अंततः घर सस्ते होते। बजट 2026 में इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

2. सिंगल विंडो क्लीयरेंस (Single Window Clearance)

भारत में एक हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए लगभग 50 से अधिक अनुमतियों (Permissions) की आवश्यकता होती है। इससे प्रोजेक्ट में देरी होती है और लागत बढ़ती है। इंडस्ट्री को उम्मीद थी कि बजट में डिजिटल माध्यम से 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस' के लिए कोई राष्ट्रव्यापी रोडमैप पेश किया जाएगा।

3. टैक्स लाभ (Section 24b और 80EEA)

मध्यम वर्ग को उम्मीद थी कि होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली ₹2 लाख की छूट (Section 24b) को बढ़ाकर ₹4-5 लाख किया जाएगा। हालांकि, बजट में इस सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिससे बड़े शहरों के खरीदारों में थोड़ी निराशा है।

होम-बायर्स (Home Buyers) पर क्या होगा असर?

यदि आप एक आम भारतीय नागरिक हैं और 2026 में अपना घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए यह बजट मिला-जुला रहा है।

टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ेंगे अवसर

मेट्रो शहरों (दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु) में जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं। बजट 2026 का फोकस टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर है। इसका मतलब है कि लखनऊ, जयपुर, इंदौर और पटना जैसे शहरों में अब बेहतर कनेक्टिविटी और किफायती प्रोजेक्ट्स देखने को मिलेंगे।

ब्याज दरें और सब्सिडी (CLSS)

क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) के तहत कुछ विशेष वर्गों को राहत देने की बात कही गई है। यदि आपकी पारिवारिक आय एक निश्चित सीमा के भीतर है, तो आप होम लोन पर ब्याज सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं। इससे ईएमआई (EMI) का बोझ थोड़ा कम होगा।

रियल एस्टेट नियम: RERA और सर्कल रेट्स की भूमिका

बजट के साथ-साथ खरीदारों को स्थानीय नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए। सरकार ने राज्यों को सुझाव दिया है कि वे अपने सर्कल रेट्स (Circle Rates) को बाजार की कीमतों के करीब लाएं ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

RERA (Real Estate Regulatory Authority): बजट में RERA को और मजबूत बनाने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम की बात कही गई है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि डेवलपर्स बजट में आवंटित राशि का सही उपयोग करें और समय पर पजेशन दें।

डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स: बजट 2026 में भूमि सुधारों और डिजिटल रिकॉर्ड्स (Bhu-Aadhar) के लिए फंड दिया गया है। इससे संपत्ति के विवाद कम होंगे और खरीदारी की प्रक्रिया सुरक्षित होगी।

क्या इंडस्ट्री को सच में 'कम' मिला?

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार का पूरा ध्यान 'अफोर्डेबल हाउसिंग' पर है, लेकिन 'लक्जरी' और 'मिड-सेगमेंट' को अनदेखा कर दिया गया है। भारत में अब मध्यम वर्ग की आबादी बढ़ रही है जो ₹50 लाख से ₹1 करोड़ के बीच के घर चाहती है। इस सेगमेंट के लिए बजट में कोई विशेष टैक्स छूट या प्रोत्साहन नहीं दिया गया है।

साथ ही, निर्माण सामग्री (Raw Materials) जैसे स्टील और सीमेंट पर GST की दरों को कम करने की मांग भी पूरी नहीं हुई है। वर्तमान में इन पर 28% तक GST लगता है, जो सीधा घर की कीमत को बढ़ाता है।

निवेशकों (Investors) के लिए बजट का संदेश

यदि आप रियल एस्टेट में निवेश करना चाहते हैं, तो बजट 2026 आपको 'रेंटल हाउसिंग' (Rental Housing) की ओर इशारा करता है। सरकार औद्योगिक क्षेत्रों के पास कामकाजी लोगों के लिए रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स बनाने पर जोर दे रही है।

REITs (Real Estate Investment Trusts): बजट में REITs को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए कुछ टैक्स नियमों को सरल किया गया है। छोटे निवेशक अब कम पैसों में कमर्शियल प्रॉपर्टी का हिस्सा बन सकते हैं।

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG): प्रॉपर्टी बेचने पर लगने वाले टैक्स में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जो निवेशकों के लिए एक स्थिर संकेत है।

निष्कर्ष (Conclusion)

बजट 2026 भारतीय रियल एस्टेट के लिए "विकास और सावधानी" का मिश्रण है। जहाँ एक तरफ PMAY के बजट में वृद्धि ने गरीबों और निम्न मध्यम वर्ग के 'अपना घर' के सपने को पंख दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ बड़े सुधारों (जैसे इंडस्ट्री स्टेटस और टैक्स छूट) की कमी ने डेवलपर्स को थोड़ा निराश किया है।

अंतिम सलाह: यदि आप खरीदार हैं, तो यह समय टियर-2 शहरों में निवेश करने या PMAY 2.0 के लाभों को समझने का है। हमेशा ध्यान रखें कि कोई भी संपत्ति खरीदने से पहले उसका RERA रजिस्ट्रेशन जरूर चेक करें।